Sbg 9.28 htshg

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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।9.28।।ऐसा करनेसे तुझे जो लाभ होगा वह सुन --, इस प्रकार कर्मोंको मेरे अर्पण करके तू शुभाशुभ फलयुक्त कर्मबन्धनसे अर्थात् अच्छा और बुरा जिसका फल,है ऐसे कर्मरूप बन्धनसे छूट जायगा। तथा इस प्रकार तू संन्यासयोगयुक्तात्मा होकर? -- मेरे अर्पण करके कर्म किये जानेके कारण जो संन्यास है और कर्मरूप होनेके कारण जो योग है उस संन्यासरूप योगसे जिसका अन्तःकरण युक्त है उसका नाम संन्यासयोगयुक्तात्मा है? ऐसा होकर? -- तू इस जीवितावस्थामें ही कर्मबन्धनसे मुक्त होकर इस शरीरका नाश होनेपर मुझे ही प्राप्त हो जायगा। अर्थात् मुझमें ही विलीन हो जायगा।