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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।9.27।।क्योंकि यह बात है? इसलिये --, हे कुन्तीपुत्र तू जो कुछ भी स्वतःप्राप्त कर्म करता है? जो खाता? जो कुछ श्रौत या स्मार्त यज्ञरूप हवन करता है? जो कुछ सुवर्ण? अन्न? घृतादि वस्तु ब्राह्मणादि सत्पात्रोंको दान देता है और जो कुछ तपका आचरण करता है? वह सब मेरे समर्पण कर।