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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।9.15।।वे किसकिस प्रकारसे उपासना करते हैं सो कहते हैं --, कुछ ( ज्ञानीजन ) दूसरी उपासनाओंको छोड़कर भगवद्विषयक ज्ञानरूप यज्ञसे मेरा पूजन करते हुए उपसना किया करते हैं अर्थात् परमब्रह्म परमात्मा एक ही है? ऐसे एकत्वरूप परमार्थज्ञानसे पूजन करते हुए मेरी उपासना करते हैं। और कोईकोई पृथक् भावसे अर्थात् आदित्य? चन्द्रमा आदिके भेदसे इस प्रकार समझकर उपासना करते हैं कि वही भगवान् विष्णु? सूर्य आदिके रूपमें स्थित हुए हैं। तथा कितने ही भक्त ऐसा समझकर कि वही सब ओर मुखवाले विश्वमूर्ति भगवान् अनेक रूपसे स्थित हो रहे हैं। उन विश्वरूप विराट् भगवान्हीकी विविध प्रकारसे उपासना करते हैं।