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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।9.14।।किस प्रकार भजते हैं --, वे दृढ़व्रती भक्त अर्थात् जिनका निश्चय दृढ़स्थिरअचल है ऐसे वे भक्तजन सदानिरन्तर ब्रह्मस्वरूप मुझ भगवान्का कीर्तन करते हुए तथा इन्द्रियनिग्रह? शम? दम? दया और अहिंसा आदि धर्मोंसे युक्त होकर प्रयत्न करते हुए एवं हृदयमें वास करनेवाले मुझ परमात्माको भक्ितपूर्वक नमस्कार करते हुए और सदा मेरा चिन्तन करनेमें लगे रहकर? मेरी उपासना -- सेवा करते रहते हैं।