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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।9.8।।इस प्रकार अविद्यारूप --, अपनी प्रकृतिको वशमें करके? मैं प्रकृतिसे उत्पन्न हुए इस विद्यमान समग्र अस्वतन्त्र भूतसमुदायको? जो कि स्वभाववश अविद्यादि दोषोंसे परवश हो रहा है? बारंबार रचता हूँ।