Sbg 8.22 htshg

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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।8.22।।उस परमधामकी प्राप्तिका उपाय बतलाया जाता है --, शरीररूप पुरमें शयन करनेसे या सर्वत्र परिपूर्ण होनेसे परमात्माका नाम पुरुष है। हे पार्थ वह निरतिशय परमपुरुष जिससे पर ( सूक्ष्मश्रेष्ठ ) अन्य कुछ भी नहीं है जिस पुरुषके अन्तर्गत समस्त कार्यरूप भूत स्थित हैं -- क्योंकि कार्य कारणके अन्तर्वर्ती हुआ करता है -- और जिस पुरुषसे यह सारा संसार आकाशसे घट आदिकी भाँति व्याप्त है। ऐसा परमात्मा अनन्य भक्ितसे अर्थात् आत्मविषयक ज्ञानरूप भक्ितसे प्राप्त होने योग्य है।,