Sbg 8.9 htshg

From IKS BHU
Revision as of 12:30, 4 December 2025 by imported>Vij (Added {content_identifier} content)
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।8.9।।किन लक्षणोंसे युक्त परम पुरुषको ( योगी ) प्राप्त होता है इसपर कहते हैं --, जो पुरुष भूत भविष्यत् और वर्तमानको जाननेवाले -- सर्वज्ञ पुरातन सम्पूर्ण संसारके शासक और अणुसे भी अणु यानी सूक्ष्मसे भी सूक्ष्मतर परमात्माका जो भी सम्पूर्ण कर्मफलका विधायक अर्थात् विचित्ररूपसे विभाग करके सब प्राणियोंको उनके कर्मोंका फल देनेवाला है तथा अचिन्त्यस्वरूप अर्थात् जिसका स्वरूप नियत और विद्यमान होते हुए भी किसीके द्वारा चिन्तन न किया जा सके ऐसा है एवं सूर्यके समान वर्णवाला अर्थात् सूर्यके समान नित्य चेतनप्रकाशमय वर्णवाला है और अज्ञानरूप मोहमय अन्धकारसे सर्वथा अतीत है उसका बारम्बार स्मरण करता है। ( वह ) उसका स्मरण करता हुआ उसीको प्राप्त होता है इस प्रकार पूर्वश्लोकसे सम्बन्ध है।