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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।7.25।।उनका वह अज्ञान किस कारणसे है सो बतलाते हैं तीनों गुणोंके मिश्रणका नाम योग है और वही माया है उस योगमायासे आच्छादित हुआ मैं समस्त प्राणिसमुदायके लिये प्रकट नहीं रहता हूँ अभिप्राय यह कि किन्हींकिन्हीं भक्तोंके लिये ही मैं प्रकट होता हूँ। इसलिये यह मूढ़ जगत् ( प्राणिसमुदाय ) मुझ जन्मरहित अविनाशी परमात्माको नहीं जानता।