1/1/7

From IKS BHU
Revision as of 13:49, 10 December 2024 by imported>Gagan (सातवें सूत्र की व्याख्या)
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)
Jump to navigation Jump to search

आप्तोपदेशः शब्दः 1/1/7


संधि विच्छेद:

आप्तोपदेशः = आप्त + उपदेशः

शब्दः = शब्द + ः


अर्थ:

  1. आप्त: विश्वसनीय या प्रामाणिक व्यक्ति। यह वह व्यक्ति है जो सत्य और यथार्थ को जानता है तथा किसी भी प्रकार का भ्रम या स्वार्थ नहीं रखता।
  2. उपदेशः: शिक्षा या कथन। यह किसी वस्तु के बारे में जानकारी प्रदान करने वाला कथन है।
  3. शब्दः: यहाँ इसका अर्थ है आप्त द्वारा दिया गया कथन। न्याय दर्शन में, "शब्द" प्रमाण के रूप में आप्त के कथन को संदर्भित करता है।

व्याख्या:

यह न्याय दर्शन में शब्द प्रमाण की परिभाषा है। शब्द प्रमाण वह है, जो किसी आप्त (विश्वसनीय व्यक्ति) के द्वारा दिए गए उपदेश (कथन) पर आधारित होता है। यह ज्ञान का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, विशेषकर उन विषयों में जो प्रत्यक्ष या अनुमान से ज्ञेय नहीं हैं।

विशेषताएँ:

  1. आप्त:
    • व्यक्ति का सत्यनिष्ठ और निष्पक्ष होना आवश्यक है।
    • वेदों और शास्त्रों को आप्त वचन माना जाता है।
  2. उपदेश:
    • आप्त द्वारा दिया गया कथन।
    • इसे स्पष्ट और यथार्थ होना चाहिए।
  3. शब्द प्रमाण: यह किसी प्रामाणिक स्रोत से प्राप्त ज्ञान है, जो शब्दों के माध्यम से व्यक्त किया गया है।

उदाहरण:

  1. सांसारिक उदाहरण: किसी गुरु ने कहा कि "यह औषधि रोग को ठीक करेगी।"
    • गुरु आप्त हैं (क्योंकि वे सत्य बोलते हैं)।
    • यह कथन (उपदेश) शब्द प्रमाण के रूप में माना जाएगा।
  2. वैदिक उदाहरण: वेदों में कहा गया है कि "अग्नि स्वाहा से देवताओं की तृप्ति होती है।"
    • वेद आप्त वचन हैं।
    • यह ज्ञान शब्द प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है।

निष्कर्ष:

आप्त द्वारा दिया गया कथन (शब्द) ज्ञान का स्रोत होता है, और इसे "शब्द प्रमाण" कहा जाता है। यह प्रमाण प्रत्यक्ष, अनुमान, और उपमान के अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण साधन है।