Sbg 7.15 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।7.15।।यदि आपके शरण हुए मनुष्य इस मायासे तर जाते हैं तो फिर सभी आपकी शरण क्यों नहीं लेते इसपर कहते हैं जो कोई पापकर्म करनेवाले मूढ़ और नराधम हैं अर्थात् मनुष्योंमें अधम नीच हैं एवं मायाद्वारा जिनका ज्ञान छीन लिया गया है वे हिंसा मिथ्याभाषण आदि आसुरी भावोंके आश्रित हुए मनुष्य मुझ परमेश्वरकी शरणमें नहीं आते।