Sbg 6.43 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।6.43।।क्योंकि वहाँ योगियोंके कुलमें पहले शरीरमें होनेवाले उस बुद्धिके संयोगको पाता है अर्थात् योगीकुलमें जन्म लेते ही उसका पूर्वजन्ममें प्राप्त हुई बुद्धिसे सम्बन्ध हो जाता है और हे कुरुनन्दन वह उस पूर्वकृत संस्कारके बलसे पूर्ण सिद्धि प्राप्त करनेके लिये फिर और भी अधिक प्रयत्न करता है।