1/2/4
अवतरण
हेतुलक्षणाभावादहेतवो हेतुसामान्याद्धेतुवदाभासमानाः
सत् हेतुओं का लक्षण नहीं रहने से जो हेतु न होने पर भी हेतुओं के समान कुछ धर्मों के रहने के कारण हेतुओं के समान प्रतीत होने वाले हेत्वाभास कहाते हैं वे ये हैं- अर्थात हेत्वाभास इस शब्द के व्युत्पत्ति के बल से हेत्वाभासों का सामान्य लक्षण सूत्रकार करते हैं-
सूत्र
सव्यभिचारविरुद्धप्रकरणसमसाध्यसमकालातीता हेत्वाभासाः 1/2/4
पदच्छेद
सव्यभिचार, विरुद्ध, प्रकरण सम (सत्प्रतिपक्ष), साध्यसम (असिद्ध), कालातीत (वाधित) ।
सूत्रकार
पूर्वग्रन्थ में व्याप्ति तथा पक्षधर्मता विशिष्ट हेतु को सद्धेतु कहते हैं ऐसा प्रतिज्ञादि पाँच अवयवों के निरूपण में सिद्ध हो चुका है, अतः असत् हेतु कौन से होते हैं, इस शिष्यों की जिज्ञासा के निरास के किये सूत्रकार असत् हेतु ( हेत्वाभासो) का निरूपण करते हैं कि हेतु के कुछ पूर्वोक्त पक्षसत्ता आदि पाँच रूपों में से जिनमें कुछ धर्म रहने के कारण जो हेतु के समान प्रतीत होते हैं, ऐसे दुष्टहेतु सव्यभिचार, विरुद्ध, प्रकरण (सत्प्रतिपक्ष ) साध्यसम (असिद्ध) तथा कालीतीत (वाधित), नाम के पाँच हेत्वाभास (दुष्टहेतु ) होते हैं