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==== <big>'''पदच्छेद'''</big> ====
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यथोक्ताध्यवसायादेव, तद्विशेषापेक्षात्, संशये, न, संशयो, न, अत्यन्तसंशयो, वा।
यथोक्ताध्यवसायादेव, तद्विशेषापेक्षात्, संशये, न, संशयो, न, अत्यन्तसंशयो, वा।
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==== <big>'''पदपदार्थ'''</big> ====
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!संख्या
!पद
!अर्थ
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|1
|'''यथोक्तध्यवसायादेव'''
|द्वितीयाध्याय के प्रथमाह्निक के २३वें सूत्र में कहे हुए समानधर्म आदि के अध्यवसाय (ज्ञान) से ही
|-
|2
|'''तद्विशेषापेक्षात्'''
|जो समानधर्मादि वाले वृक्ष तथा पुरुष पदार्थों के विशेष (भेदक) धर्म के ज्ञान की अपेक्षा करता है उससे
|-
|3
|'''संशये'''
|संशय की उत्पत्ति मानने के कारण
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|4
|'''न'''
|नहीं होगा
|-
|5
|'''असंशयः'''
|संशय का न होना
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|6
|'''न'''
|नहीं होगा
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|7
|'''अत्यन्त संशय'''
|सदा सन्देह
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|8
|'''वा'''
|अथवा
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Revision as of 18:13, 27 March 2025

सूत्र

यथोक्ताध्यवसायादेव तद्विशेषापेक्षात् संशये नासंशयो नात्यन्तसंशयो वा 2/1/6


पदच्छेद

यथोक्ताध्यवसायादेव, तद्विशेषापेक्षात्, संशये, न, संशयो, न, अत्यन्तसंशयो, वा।


पदपदार्थ

संख्या पद अर्थ
1 यथोक्तध्यवसायादेव द्वितीयाध्याय के प्रथमाह्निक के २३वें सूत्र में कहे हुए समानधर्म आदि के अध्यवसाय (ज्ञान) से ही
2 तद्विशेषापेक्षात् जो समानधर्मादि वाले वृक्ष तथा पुरुष पदार्थों के विशेष (भेदक) धर्म के ज्ञान की अपेक्षा करता है उससे
3 संशये संशय की उत्पत्ति मानने के कारण
4 नहीं होगा
5 असंशयः संशय का न होना
6 नहीं होगा
7 अत्यन्त संशय सदा सन्देह
8 वा अथवा