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	<title>1/1/28 - Revision history</title>
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	<subtitle>Revision history for this page on the wiki</subtitle>
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		<title>imported&gt;Gagan: Created page with &quot;&#039;&#039;&#039;सर्वतन्त्राविरुद्धस्तन्त्रेऽधिकृतोऽर्थः सर्वतन्त्रसिद्धान्तः 1/1/28&#039;&#039;&#039; ----  === संधि विच्छेद: ===  # &#039;&#039;&#039;सर्व + तन्त्र + अविरुद्ध + अस्तन्त्रे + अधिकृत + अर्थ + सर्व + तन्त्र + सिद्धान्तः&#039;&#039;&#039; #* &#039;&#039;&#039;सर्व&#039;&#039;&#039;:...&quot;</title>
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		<updated>2024-12-26T11:11:49Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Created page with &amp;quot;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सर्वतन्त्राविरुद्धस्तन्त्रेऽधिकृतोऽर्थः सर्वतन्त्रसिद्धान्तः 1/1/28&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; ----  === संधि विच्छेद: ===  # &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सर्व + तन्त्र + अविरुद्ध + अस्तन्त्रे + अधिकृत + अर्थ + सर्व + तन्त्र + सिद्धान्तः&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; #* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सर्व&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;:...&amp;quot;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;New page&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सर्वतन्त्राविरुद्धस्तन्त्रेऽधिकृतोऽर्थः सर्वतन्त्रसिद्धान्तः 1/1/28&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== संधि विच्छेद: ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
# &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सर्व + तन्त्र + अविरुद्ध + अस्तन्त्रे + अधिकृत + अर्थ + सर्व + तन्त्र + सिद्धान्तः&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
#* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सर्व&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;: सभी, सम्पूर्ण।&lt;br /&gt;
#* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;तन्त्र&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;: तंत्र, प्रणाली।&lt;br /&gt;
#* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अविरुद्ध&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;: विरोधी नहीं, विरोधाभासी नहीं।&lt;br /&gt;
#* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अस्तन्त्रे&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;: अस्तित्व में, तंत्र के भीतर।&lt;br /&gt;
#* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अधिकृत&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;: अनुमोदित, प्राधिकृत।&lt;br /&gt;
#* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अर्थ&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;: उद्देश्य, अर्थ।&lt;br /&gt;
#* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सिद्धान्त&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;: सिद्धांत, सिद्धता।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== अर्थ: ===&lt;br /&gt;
यह श्लोक कहता है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;जिस तंत्र में किसी अन्य तंत्र से विरोध न हो, उस तंत्र में प्राधिकृत उद्देश्य (अर्थ) ही सभी तंत्रों के सिद्धांत का आधार होता है।&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अर्थात&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;, एक ऐसा तंत्र जो अन्य तंत्रों के विरोध में न हो, वही तंत्र अपना उद्देश्य (अर्थ) सिद्ध करता है और वह सभी तंत्रों का सिद्धांत बन जाता है।&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== व्याख्या: ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
# &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सर्वतन्त्र&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;:&lt;br /&gt;
#* यहाँ &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सर्वतन्त्र&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; का मतलब है समग्र तंत्र या सभी प्रकार के तंत्र।&lt;br /&gt;
#* यह संकेत करता है कि सभी तंत्रों को किसी मूल तंत्र के सिद्धांत से समझा जा सकता है।&lt;br /&gt;
# &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अविरुद्ध&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;:&lt;br /&gt;
#* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अविरुद्ध&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; का मतलब है वह तंत्र जो किसी अन्य तंत्र के विरोध में न हो।&lt;br /&gt;
#* यदि एक तंत्र दूसरे तंत्र के साथ विरोध नहीं करता है, तो वह दोनों तंत्र एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं।&lt;br /&gt;
# &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अधिकृतोऽर्थ&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;:&lt;br /&gt;
#* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अधिकृत&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; का अर्थ है प्राधिकृत या अनुमोदित।&lt;br /&gt;
#* इसका मतलब यह है कि किसी तंत्र का उद्देश्य या अर्थ उसे मान्यता प्राप्त होता है जब वह अन्य तंत्रों के सिद्धांत से मेल खाता है।&lt;br /&gt;
# &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सर्वतन्त्रसिद्धान्त&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;:&lt;br /&gt;
#* जब किसी तंत्र का उद्देश्य या अर्थ सभी तंत्रों के सिद्धांत से मेल खाता है, तो वह सिद्धांत सर्वतन्त्रसिद्धान्त कहलाता है।&lt;br /&gt;
#* इस सिद्धांत का यह अर्थ है कि किसी तंत्र का सही उद्देश्य वह होता है जो सभी तंत्रों के सिद्धांत से मेल खाता हो, और जो विरोधात्मक न हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== उदाहरण: ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
# &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सामाजिक तंत्र&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;:&lt;br /&gt;
#* एक समाज का तंत्र विभिन्न भागों में विभाजित हो सकता है, जैसे शासन, शिक्षा, न्याय आदि।&lt;br /&gt;
#* यदि ये सभी भाग आपस में विरोधी नहीं होते, बल्कि एक दूसरे के साथ सामंजस्यपूर्ण होते हैं, तो पूरे समाज का तंत्र समग्र सिद्धांत से मेल खाता है।&lt;br /&gt;
#* इस स्थिति में समाज का उद्देश्य या अर्थ सर्वतन्त्रसिद्धान्त में परिलक्षित होता है।&lt;br /&gt;
# &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;विज्ञान और दर्शन&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;:&lt;br /&gt;
#* अगर विज्ञान और दर्शन के सिद्धांत एक दूसरे से अविरुद्ध होते हैं, तो एक ही उद्देश्य और सिद्धांत दोनों के भीतर समाहित हो सकते हैं।&lt;br /&gt;
#* उदाहरण के लिए, भौतिकी और दर्शन में समानताएँ होती हैं जब दोनों सिद्धांत समान प्राकृतिक कानूनों को स्वीकारते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== निष्कर्ष: ===&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सर्वतन्त्राविरुद्धस्तन्त्रेऽधिकृतोऽर्थः सर्वतन्त्रसिद्धान्तः&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; श्लोक यह बताता है कि जब किसी तंत्र में अन्य तंत्रों से कोई विरोध नहीं होता, तो वह तंत्र अपना उद्देश्य (अर्थ) सिद्ध करता है, और वही उद्देश्य सभी तंत्रों के सिद्धांत का आधार बनता है। इसका मतलब यह है कि किसी तंत्र का उद्देश्य तभी प्रामाणिक होता है जब वह अन्य तंत्रों के सिद्धांत से मेल खाता है और विरोधी नहीं होता।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;Gagan</name></author>
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